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<title>توهم ِواقعی/ مایـا* </title>
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<title></title>
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<description>&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;STRONG&gt;&amp;nbsp; &lt;/STRONG&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;STRONG&gt;&amp;nbsp;&lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;FONT size=2&gt;هله، نوميد نباشي که &amp;nbsp;تو را يـار برانـد&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;BR&gt;&amp;nbsp; گرت امروز براند نه که فردات بخوانـد &lt;/FONT&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;&amp;nbsp;در اگر بر تو ببندد، مرو و صبر کن آن جا&amp;nbsp; &lt;BR&gt;&amp;nbsp; ز پس ِ&amp;nbsp;صبـر، تـرا، او به سر صدر نشانـد &lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;و اگر بر تو ببندد همه ره‌ها و گذرها &lt;BR&gt;ره پنهان بنمايد که کس آن راه ندانـد&amp;nbsp; &lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;نه که قصاب به خنجر چو سر ميش ببرد&amp;nbsp;&lt;BR&gt;&amp;nbsp;نهلد کُشته خود را کُشد آن گاه کِشانـد&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot; align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;چو دم ميش نماند ز دم ِخود کندش پـُر*&lt;BR&gt;&lt;EM&gt;تو ببيني دم يزدان به کجا هات رسانـد&lt;/EM&gt;&amp;nbsp; &lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot; align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;&amp;nbsp;به مثل گفتم اين را و اگر نه کرم او &lt;BR&gt;نکشد هيچ کسي را و ز کشتن برهانـد&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;همگي ملک سليمان به يکي مور ببخشد&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;BR&gt;&amp;nbsp;بدهد هر دو جهان را و دلي را نرمانـد&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot; align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;دل من گرد جهان گشت و نيـابيـد مثـالـش&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;BR&gt;به که ماند؟ به که ماند؟ به که ماند؟ به که مانـد؟ &lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;هله خاموش، که بي‌گفت از اين مي همگان را&lt;BR&gt;بـچشانـد، بـچشانـد، بـچشانـد، بـچشانـد&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;تایِ بی همتـایِ عالم، *&amp;nbsp;&lt;EM&gt;مولانـا*&lt;/EM&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;STRONG&gt;&amp;nbsp;&lt;/STRONG&gt;*) قصابان (در قدیم و هم اکنون نیز در برخی ولایات) برایِ پوست کندن ِ گوسفند، پس ازسر بریدن سوراخی در گوشه ای از پوستِ آن ایجاد میکردند و از آن سوراخ با نی (یا نی ِ قلیان) می دمیدند تا پوست از گوشت چدا شود.&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;تکیّه مولانا بیشتر روی آن قسمت است که&amp;nbsp;قصاب با&amp;nbsp;نفس&amp;nbsp;ِ خود گوسفندِ بی جان&amp;nbsp;را آکنده مینماید. و در نهایت اینکه ای بشر در&amp;nbsp;تو&amp;nbsp;هم از&amp;nbsp;دم&amp;nbsp;ِ خداونـد دمیده شده.&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;/FONT&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Fri, 10 Aug 2007 01:09:05 GMT</pubDate>
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<title>بـدرووود</title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-44.aspx</link>
<description>&amp;nbsp; 
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&quot;&lt;EM&gt;در رفتن ِ&amp;nbsp; جان از بدن، گویند هر نوعی سخن&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; من خود به چشم ِ خویـشتن دیدم که &lt;STRONG&gt;جانم&lt;/STRONG&gt; می رود&lt;/EM&gt;&quot;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;من این شعر&amp;nbsp;ِ سعدیِ عزیز رو در مراسم ِ به خاکسپاریِ جسم&amp;nbsp;ِ&amp;nbsp;`مادر ِ نازنینم، کاملاً و بدونِ هیجگونه &quot;اغراق ِ شاعرانه ای&quot; لمس کردم و برایم مصداق پیدا کرد. البته&amp;nbsp;در واقع &amp;nbsp;روح و جانِ او چند روز قبل از اون مراسم ما رو ترک گقته بود، ولی بالاخره جسم منزلگاه و تجلّی گاهِ روح و بسیـار خـو گیرنده&amp;nbsp;ست.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;چندی پیش عزیزی که&amp;nbsp;از ناخوشی ِ مادرم با خبر بود، دعایی برایم فرستاد با این مضمون که: &quot;&lt;EM&gt;خـدایـا به من عطا کن،&amp;nbsp;قدرتِ پذیرش و قبول&amp;nbsp;ِ&amp;nbsp;چیزهائی رو که تغییر ِ اونها درتوانِ&amp;nbsp;من نیست&amp;nbsp; و&amp;nbsp;شهامتِ تغییر ِ&amp;nbsp;چیزهائی رو&amp;nbsp;که تغییر ِ اونها در توانم هست، و همچنین دانـائی تمیز و تشخیص&amp;nbsp; تفاوتِ بین ِ این دو را&lt;/EM&gt;.&quot;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بنا به یک تجربۀ عینی به این نتیجه رسیدم که واقعاً می بایست&amp;nbsp;قسمتِ سوّم ِ این دعا رو&amp;nbsp; با طلا نوشت و به گوش ِ جان سپرد. چرا که،&amp;nbsp;مادر&amp;nbsp;ِ من&amp;nbsp;که در حدودِ ۲۰ سال بود&amp;nbsp;که از&amp;nbsp;بیماریِ قلبی رنج میبـُرد و وخامتِ حالش به حدّی رسیده بود که واجدِ شرایط برایِ عمل ِ پیوندِ قلب شده بود و&amp;nbsp;درحدودِ&amp;nbsp;۵ ماه و اندی پیش، پس از ۳/۴ سال انتظار برایِ پیوندِ قلب، نوبت ِ پیوندِ قلب&amp;nbsp;نصبـبش شد. عمل با موفقیّت انجام شد ولی افسوس و هــزاران افسوس که مشکلات و ناهمواریهایِ بسیـــار فراوانی&amp;nbsp;در پی&amp;nbsp;داشت.&amp;nbsp;&amp;nbsp;بدلیل ِ طـولاتی&amp;nbsp;شدنِ دورۀ&amp;nbsp;انتظار برایِ پیوندِ قلب دیگر ِ اعضایِ بدن ضعیف و ناسور شده بودند، و از زمانِ ورودِ این عضو ِ جدید در بدنپ، آنها&amp;nbsp;سر&amp;nbsp;ِ ناسازگاری گذاشته و پذیرایِ این عضو ِ سالم ولی&amp;nbsp;بیگانه نبودند.&amp;nbsp;نمونه اینکه&amp;nbsp;قلبِ&amp;nbsp; جدید&amp;nbsp;مثل ِ ساعت کار میکرد ولی&amp;nbsp; کلیه ها و کبـد (جگر که بدلیل ِ اهمّیّتِ وظایفی که در بدن به عهده دارد آنرا قلبِ دوّم ِ بدن نیز میـنامند) از کار افتادند.&amp;nbsp;پزشکانِ حاذق هم، که ماشاالله، همۀ بیـنشِشون هم مثل ِ دانشِشون فقط محدود به کتبِ درسی ست، چند بار در چند مورد در رابطه با&amp;nbsp;اوضاعِ جسمی ِ مادرم اذعان داشتند که؛ &quot;بدلیل ِ نامشخصی که هیج توضیح ِ پزشکی برایش وجود ندارد، فلان دارو در بدنِ&amp;nbsp;مادرتون جوابِ معکوس میدهد&quot; یا اینکه &quot;بطور ِ حیرت انگیزی که هیچ توجیهِ علمی ای برای آن وجود ندارد فلان اتّفاق در حال ِ رخ دادن در بدنِ ایشون ست&quot;و .......!!&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;کار بجائی رسیده بود که&amp;nbsp;نازنین مادرم که با پایِ خودش به بیمارستان رفت در دو هفتۀ آخر زندگیش با کمکِ دستگاههایِ مختلف&amp;nbsp;اعم از دیالیز، تنظیم ِ فشار خون، تا حتّی دستگاهِ تنفس سپری شد و&amp;nbsp;&amp;nbsp;فقط قادر بود چشمان ِ مظلومش&amp;nbsp;رو باز&amp;nbsp;ُ بسته&amp;nbsp;و با معصومانه ترین نگاههایِ عالم با&amp;nbsp;ما ارتباط برقرار&amp;nbsp;کند!!!!!&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;واقعیّت این ِ&amp;nbsp;که رفتن به سفر ِبی بازگشت که در تقدیر ِ همۀ آدمها&amp;nbsp;نهفته، نصیبِ مادر ِ من هم میشد بخصوص که قبل از عمل هم فقط در حدودِ ۲۰٪&amp;nbsp;از قلبِ او کارائی داشت، ولی حدِّاقل تا این اندازه متحمّل ِرنج و عذاب نمی شد.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;هی هـی هـــی ....... در نهایت چاره ای بجز پذیرش ِ&amp;nbsp; بـدرود گفتن باقی نماند و&amp;nbsp;با استفاده از کلام&amp;nbsp;ِ مکمل ِ تایِ بی همتـّایِ عالم/مولویِ عزیز&amp;nbsp;اینکار رو میکنم.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000000&gt;اي آن که بر اسب بقا از دير فاني مي‌روي&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; دانـا و بيـناي رهي آن سو که داني مي‌روي&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بي‌همره جسم و عرض بي‌دام و دانه بي‌غرض&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; از تلخکامي مي‌رهي در کامراني مي‌روي&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;اي چون فلک دربافته ‌اي همچو مه درتافته&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; از ره نشاني يافته در بي‌نشاني مي‌روي&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;اي بس طلسمات عجب بستي برون از روز و شب&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; تا چشم پندارد که تو اندر مکاني مي‌روي &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;شب کاروان‌ها زين جهان بر مي‌رود تا آسمان&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; تو خود به تنهايي خود صد کارواني مي‌روي&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;اي ظاهر و پنهان چو جان وي چاکر و سلطان چو جان&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; کي بينمت پنهان چو جان در بي‌زباني مي‌روي&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;ني همچو عقل دانه چين ني همچو نفس پُر ز کين&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;ني روح حيوان زمين تو جانِ جاني مي‌روي&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;IMG style=&quot;WIDTH: 556px; HEIGHT: 381px&quot; height=395 alt=بـدرووود hspace=0 src=&quot;http://www.sharemation.com/Mya/Copy%20of%20March1207-23.JPG&quot; width=588 align=baseline border=0&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Thu, 22 Mar 2007 07:11:05 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title>درخواست</title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-42.aspx</link>
<description>&lt;IMG alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot;http://www.sharemation.com/Mya/Praying%20for%20the%20miracle%20of%20lover%27s%20resurrection.jpg&quot; align=baseline border=0&gt; 
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;طلبِ سلامتی برایِ فرشتهءِ نازنینی با دلنوازترین و پُرمهرترین اسامی ِ عالم&amp;nbsp;&quot;&lt;EM&gt;مـادر&quot;&lt;/EM&gt;،&lt;EM&gt;&amp;nbsp; &lt;/EM&gt;که در عین ِ ناتوانی ِ مفرط، تلاش برایِ رهائی از بیماری رو ترک نگفته ولی جسمش اصلاً&amp;nbsp; با او یار و همراه نیست.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خواهشاً، در این طلبِ سلامتی مرا یاری دهید.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;پیشاپیش از لطفتون ممنونم.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Fri, 12 Jan 2007 08:39:05 GMT</pubDate>
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<dc:creator>mya</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>فقط وفایِ به عهد</title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-41.aspx</link>
<description>&amp;nbsp;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;بزودی میـآم، ازم قطعِ امیـد نکنیـدها!!!&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Tue, 02 Jan 2007 09:20:05 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title>روز ِ آگاهی ... </title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-40.aspx</link>
<description>&amp;nbsp; 
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;سلام سلام صد تا سلام، &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;روز ِ&amp;nbsp;۲۵ سپتامبر&amp;nbsp;&lt;A href=&quot;http://http://ataxia.org/events/annual-meeting.aspx&quot; target=_blank&gt;&lt;/A&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;مصادف با سوم مهر ماه فرا رسید و&amp;nbsp;من آمدم تا به&amp;nbsp;دوستانِ قدیمی&amp;nbsp;یادآوری کنم و به دوستانِ جدید این خبر&amp;nbsp;رو بدم،&amp;nbsp;که اینروز توسطِ بنیادِ ملّی ِ إی تکسیا/&lt;A href=&quot;http://www.ataxia.org/&quot; target=_blank&gt;The National Ataxia Foundation &lt;/A&gt;و اعضاءِ متعددِ آن در سراسر ِ دنیـا، بعنوانِ &quot;&lt;A href=&quot;http://internaf.org/Friends/aadarticle.html&quot; target=_blank&gt;روز بین المللی ِِ آگاهی از إی تکسیا&lt;/A&gt;&quot; نامیده شده است. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;واژه’ &quot;إی تکسیا&quot; ریشه’ یونانی دارد به معنایِ: بدونِ نظم و ترتیب، عدم ِ همکاری و همآهنگی ست. این واژه در فرهنگِ لغاتِ پزشکی ِ مـِریـَم&amp;nbsp;و ِبستر اینگونه تعریف شده است که: &quot;یک ناتوانی ِ هماهنگی ِ حرکاتِ عضلانی که حاکی از اختلالاتِ سلسله’ اعصاب است.&quot;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;إی تکسیا درست مثل ِ یک عبارتِ&amp;nbsp;چتریـست که شامل ِ ۱۵نوع&amp;nbsp;ِ مختلف از اختلالاتِ عصبی، که رویِ تعادل و&amp;nbsp;هماهنگی و صحبت کردن مؤثر است، میشود. إی تکسیاها کمیاب و پیشرونده هستند که مردم از هر سن، نـژاد، کیش و آئینی&amp;nbsp;متأثـرِ از آن هستند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;همینطور که بیماری پیشرفت میکند&amp;nbsp;کیفیتِ آن دائـِم رو به پـسرفت است، بتدریج&amp;nbsp;عضلات کمتر و کمتر از مغز فرمانبرداری میکنند. روز به روز &lt;STRONG&gt;شاهد ِ&lt;/STRONG&gt;ازدست دادنِ توانائیهای ِخیلی عادیِ بدنتان هستید.&amp;nbsp;&lt;EM&gt;درست مثل ِ اینست که در یک بدنی اسیر شده باشید که به دستورات و خواست هایِ&amp;nbsp;شما هیچ پاسخی نمیدهد!&lt;/EM&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;إی تکسیا بیماریِ خیلی شناخته شده ای توسطِ عموم ِ مردم نیست و هنوز توجّهِ کافی،&amp;nbsp;مثل ِ سایر ِ بیماریهایِ مربوط به سلسلهء اعصابِ مرکزیِ، به آن معطوف نشده است. هدفِ اصلی از&amp;nbsp;تمرکز رویِ شناساندنِ این بیماری به عموم، همانا مطلع نمودن مردم به منظور ِ&amp;nbsp;دربافتِ&amp;nbsp;کمک درمانی&amp;nbsp;و صد البته، &lt;EM&gt;حمایتِ&amp;nbsp;عاطفی&lt;/EM&gt; است که مردم ِ مبتلا، به آنها نیـاز دارند. از آنجائیکه إی تکسیا بیماریِ نادری استِ، با&amp;nbsp;احساس ِ تنهائی و انـزوایِ مفرطی همراه است. بنابراین نیاز به آگاه نمودنِ هر چه بیشتر ِ مردم دنیـا از این بیماری،&amp;nbsp;مصّر و محیل، نیز هست.&amp;nbsp;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;&quot;وقتی مردم&amp;nbsp;آگاه و مطلع باشند&amp;nbsp;از اینکه مشکل چیست، چیزهایِ عالی ای انجام پذیـر است&quot;. بنا به Donna Gruetzmacher که مجریِ&amp;nbsp; کارگردان در NAF میباشد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;به عزیزانی که مایلند از نوع ِ إی تکسیایی که من دارم مطلع باشند، باید بگم که&amp;nbsp;آن فریدرایک-ز&amp;nbsp;إی تکسیا &lt;A href=&quot;http://www.ncbi.nlm.nih.gov/entrez/dispomim.cgi?id=229300&quot; target=_blank&gt;/Friedreich&apos;s Ataxia/FRDA &lt;/A&gt;&amp;nbsp;نام دارد که آنرا بعد از کاشفِ آن، که یک پزشکِ آلمانی بوده&amp;nbsp;نام نهاده انده.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;و&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sun, 24 Sep 2006 07:32:05 GMT</pubDate>
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<dc:creator>mya</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>لاله’ تنـها</title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-35.aspx</link>
<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#800000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;تا بهار دلنشین آمده سوی چمن&lt;BR&gt;ای بهار آرزو بر سرم سایه فکن&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;چون نسیم نو بهار بر آشیانم کن گذر &lt;BR&gt;تا که گلباران شود کلبه ویران من&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;تا بهار زندگی آمد بیا آرام جان&lt;BR&gt;تا نسیم از سوی گل آمد بیا دامن کشان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;چون سپندم بر سر آتش نشان بنشین دمی&lt;BR&gt;چون سرشکم در کنار بنشین نشان سوز نهان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;تا بهار دلنشین آمده سوی چمن&lt;BR&gt;ای بهار آرزو بر سرم سایه فکن&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;چون نسیم نو بهار بر آشیانم کن گذر &lt;BR&gt;تا که گلباران شود کلبه ویران من&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;بـاز آ ببین در حیرتم بشکن سکوت خلوتم&lt;BR&gt;چون &lt;EM&gt;لاله’ تنها&lt;/EM&gt; ببین بر چهره داغ حسرتم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;ای روی تو آئیـنه ام عشقت غم دیریـنه ام&lt;BR&gt;بـاز آ چو گل در این بهار سر را بنه بر سینه ام&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#003300&gt;(بیژن ترقی)&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;IMG alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot;https://www.sharemation.com/Mya/One%20in%20a%20Million.jpg&quot; align=baseline border=0&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Mon, 20 Mar 2006 09:04:46 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title>بـجا گذاشتن ِ ...</title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-24.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;&lt;/FONT&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;&lt;/FONT&gt;&amp;nbsp;&lt;FONT color=#333333&gt;روزی یـه رهگذری از من سؤال کرد:&amp;nbsp;سه تا از مورد توجّه ترین حیوانهائی را که در نظر داری نام ببر.&amp;nbsp;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;بعد از اینکه اونها را نام بردم، دلیل ِ این پرسش رو جویا شدم. و اینطور شنیدم که: &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;OL dir=rtl&gt;
&lt;LI&gt;
&lt;DIV style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;اولّین حیوانِ نامبرده، تمثیلی است از آنچه&amp;nbsp; تو از خودت در ذهن داری. &lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;LI&gt;
&lt;DIV style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;نامبرده’ دوّم، تمثیل ِ&amp;nbsp;آنچه است که دیگران راجع به تو می پـندارند.&amp;nbsp; &lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;LI&gt;
&lt;DIV style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;و سوّمین نامبرده، نمایانگر ِ آنچه اسب که در واقع خودِ توست!&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;&lt;/LI&gt;&lt;/OL&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;ولی من به خلافِ این گفته فکر میکنم، که مهم نیست&amp;nbsp;خودِ تو یا دیگران چگونه شخص ِ تـو را قضاوت میکنید. حتّی مهم نیست که تـو&amp;nbsp;در ظاهر چــه هستی!! &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;بلکه مهم این ِکه در&amp;nbsp;گذرگاهِ زندگی از هر جائی که گذر میکنی، از خودت زیبائی ای&amp;nbsp;بـجا بگذاری .....&lt;/FONT&gt;&amp;nbsp;!!!&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;IMG alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot;https://www.sharemation.com/Mya/Leaving%20beauty.jpg&quot; align=baseline border=0&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;I&apos;d rather be a sparrow than a snail.&lt;BR&gt;Yes i would.&lt;BR&gt;If i could,&lt;BR&gt;I surely would.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;ترجیح میـدم که یه پرستو باشم تا اینکه یه حلـزون.&lt;BR&gt;آره ترجيح ميـدم.&lt;BR&gt;فقط اگه مي تونستم، &lt;BR&gt;حتماً مي شدم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;I&apos;d rather be a hammer than a nail.&lt;BR&gt;Yes i would.&lt;BR&gt;If i only could,&lt;BR&gt;I surely would.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;ترجیح میـدم که یه چكش باشم تـا یه ميـخ.&lt;BR&gt;آره ترجيح ميـدم.&lt;BR&gt;اگه مي تونستم، &lt;BR&gt;حتماً مي شدم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;Away, i&apos;d rather sail away&lt;BR&gt;Like a swan that&apos;s here and gone&lt;BR&gt;A man grows older every day&lt;BR&gt;It gives the world&lt;BR&gt;Its saddest sound,&lt;BR&gt;Its saddest sound.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;دور، ترجيح ميـدم با بالهايِ گسترده دور پرواز كنم.&lt;BR&gt;درست مثل ِ قويي كه لحظه اي اينجاست و لحظه اي ديگر رفته. &lt;BR&gt;بشر هر روز پيـر و پيـرتر ميشه.&lt;BR&gt;اين به دنيا ميده، &lt;BR&gt;غمگينـترين مفهوم رو،&lt;BR&gt;غمگينـترين مفهوم رو.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;I&apos;d rather be a forest than a street.&lt;BR&gt;Yes i would.&lt;BR&gt;If i could,&lt;BR&gt;I surely would.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;ترجيح ميـدم يه جنگل باشم تا يه خيابون.&lt;BR&gt;آره ترجيح ميـدم.&lt;BR&gt;اگه مي تونستم، &lt;BR&gt;حتماً مي شدم.&lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;I&apos;d rather feel the earth beneath my feet,&lt;BR&gt;Yes i would.&lt;BR&gt;If i only could,&lt;BR&gt;I surely would.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=right&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot;&gt;ترجيح ميـدم كه حس كنم زمين رو زير ِ پاهام.&lt;BR&gt;آره ترجيح ميـدم.&lt;BR&gt;فقط اگه مي تونستم، &lt;BR&gt;حتماً مي كردم.&lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Tue, 29 Nov 2005 07:58:05 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title></title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-22.aspx</link>
<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;&amp;nbsp;بـخنـد تــا ....&lt;/FONT&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;IMG style=&quot;WIDTH: 638px; HEIGHT: 469px&quot; height=495 alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot; https://www.sharemation.com/Mya/smile.jpg&quot; width=688 align=baseline border=0&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&amp;nbsp;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Fri, 21 Oct 2005 10:40:05 GMT</pubDate>
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<item>
<title>روز ِ آگاهی ...</title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-20.aspx</link>
<description>&amp;nbsp; 
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;امروز روز ِ ۲۵ سپتمبــِر مصادف با سوم مهر ماه است که اینروز توسطِ بنیادِ ملّی ِ إی تکسیا/The National Ataxia Foundation و اعضاءِ متعددِ آن در سراسر ِ دنیـا، بعنوانِ &quot;روز&amp;nbsp; بین المللی ِِ آگاهی از إی تکسیا&quot; نامیده شده است. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;واژه’ &quot;إی تکسیا&quot; ریشه’ یونانی دارد به معنایِ: بدونِ نظم و ترتیب، عدم ِ همکاری و همآهنگی ست. این واژه در فرهنگِ لغاتِ پزشکی ِ مـِریم وبستر اینگونه تعریف شده است که: &quot;یک ناتوانی ِ هماهنگی ِ حرکاتِ عضلانی که حاکی از اختلالاتِ سلسله’ اعصاب است.&quot;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;إی تکسیا درست مثل ِ یک عبارتِ&amp;nbsp;چتریـست که شامل ِ ۱۵نوع&amp;nbsp;ِ مختلف از اختلالاتِ عصبی، که رویِ تعادل و&amp;nbsp;هماهنگی و صحبت کردن مؤثر است، میشود. إی تکسیاها کمیاب و پیشرونده هستند که مردم از هر سن، نـژاد، کیش و آئینی&amp;nbsp;متأثـرِ از آن هستند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;همینطور که بیماری پیشرفت میکند&amp;nbsp;کیفیتِ آن دائـِم رو به بدتر شدن است، بتدریج&amp;nbsp;عضلات کمتر و کمتر از مغز فرمانبری میکنند. روز به روز &lt;STRONG&gt;شاهد ِ&lt;/STRONG&gt;ازدست دادنِ توانائیهای ِخیلی عادیِ بدنتان هستید.&amp;nbsp;&lt;EM&gt;درست مثل ِ اینست که در یک بدنی اسیر شده باشید که به دستورات و خواست هایِ&amp;nbsp;شما هیچ پاسخی نمیدهد!&lt;/EM&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;إی تکسیا بیماریِ خیلی شناخته شده ای توسطِ عموم ِ مردم نیست و هنوز توجّهِ کافی،&amp;nbsp;مثل ِ سایر ِ بیماریهایِ مربوط به سلسلهء اعصابِ مرکزیِ، به آن معطوف نشده است. هدفِ اصلی از&amp;nbsp;تمرکز رویِ شناساندنِ این بیماری به عموم، همانا مطلع نمودن مردم به منظور ِ&amp;nbsp;دربافتِ&amp;nbsp;کمک درمانی&amp;nbsp;و صد البته، &lt;EM&gt;حمایتِ&amp;nbsp;عاطفی&lt;/EM&gt; است که مردم ِ مبتلا، به آنها نیـاز دارند. از آنجائیکه إی تکسیا بیماریِ نادری استِ، احساس ِ تنهائی و انـزوایِ مفرطی در سیر ِ بیماری وجود دارد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;&quot;وقتی مردم&amp;nbsp;آگاه و مطلع باشند&amp;nbsp;از اینکه مشکل چیست، چیزهایِ عالی ای انجام پذیـر است&quot;. بنا به Donna Gruetzmacher که مجریِ&amp;nbsp; کارگردان در NAF میباشد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;به عزیزانی که مایلند از نوع ِ إی تکسیایی که من دارم مطلع باشند، باید بگم که&amp;nbsp;آن فریدرایک-ز&amp;nbsp;إی تکسیا/Friedreich&apos;s Ataxia/FRDA نام دارد که آنرا بعد از کاشفِ آن که یک پزشکِ آلمانی بوده،&amp;nbsp;نام نهاده انده.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;و&lt;EM&gt; &lt;/EM&gt;میخوام یادآور بشم&lt;EM&gt; این منم که&amp;nbsp;إی تکسیا رو دارم، نه اینکه اون منو داشته باشه!!!&lt;/EM&gt; &lt;IMG height=18 src=&quot;http://blogfa.com/images/smileys/30.gif&quot; width=18&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;برگرفته از &lt;A href=&quot;http://www.ataxia.org/&quot; target=_blank&gt;وب سایتِ NAF&lt;/A&gt;&amp;nbsp;&lt;A href=&quot;http://www.ataxia.org/&quot; target=_blank&gt;&lt;/A&gt;&amp;nbsp;و ترجمه از خودِ بنـده.&amp;nbsp;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#000033&gt;&amp;nbsp;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sun, 25 Sep 2005 08:31:05 GMT</pubDate>
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<dc:creator>mya</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>عجب.....!!!</title>
<link>http://mya.blogfa.com/post-14.aspx</link>
<description>&amp;nbsp; 
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot;&gt;&lt;IMG style=&quot;WIDTH: 589px; HEIGHT: 443px&quot; height=441 alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot; https://www.sharemation.com/Mya/3517821-lg.jpg&quot; width=585 align=baseline border=0&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- هــِی، سلام، درچه حالی آقا لاک پشته؟ &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;&amp;nbsp;ـ علیکِ سلام، خوبم مرسی، در حالِ تجربه کردنِ «صبـر» هستم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- إ إ إ، بلا به دور،&amp;nbsp; خدا بد نده، چی شده؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- خـدا، بـد، بـلا!!! راجع به چی حرف میزنی؟؟ اولاً، بد نبیـنی، عزیـز! &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;در ثانی، &amp;nbsp;بـَد و خـدا، نـقیض ِ یکدیگرند، یعنی دو وجودیِ کاملاً متفاوتنـد که حتی حضورشون با هم همزمان در جائی محالِ ممکنه، چه رسد به اینکه (یکی) خـدا بخواد دیگری رو (بـَدی رو)&amp;nbsp;بذل و بخشش کنه.&amp;nbsp;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;&amp;nbsp;ثـالثاً، من اصلاً ارتباطِ بین ِ بـد&amp;nbsp;ُبلا بـا صبـر کردن رو متوجّه نمیشم!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- این فقط یه اصطلاحِ متداول بینِ مردم ِ، نه اینکه&amp;nbsp; خدا واقعاً و مستقیماً بـَدی رو پیشکش کنه!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- خُب تکرار ِ همین اصطلاحهایِ عامیانه ست که باعثِ گیج شدنِ بشر شده دیگه! چرا که همین تکرار ِ&amp;nbsp;مکررات باعث میشه که حرف یا گفته ای بره تویِ ضمیـر&amp;nbsp; ناخودآگاهِ بشر، و ملکهءِ ذهنـش بشه.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- در ضمن،&amp;nbsp;نگفتی که چه ارتباطی بین ِ صبـر و بد بیاری و بـلا وجود داره!&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;-&amp;nbsp;معمولاً،&amp;nbsp;هنگامیکه یه چیز ِ ناخوشایندی پیش میاد که تحمل و گذشت از اون نیز، استقامتی پایدار می طلبد، همه برایِ دلداری دادن، آرزویِ صبـر میکنند. یا اینکه وقتی سخت مشتاق و منتظر ِ دست یابی به چیزی هستی، باز هم تنها راهِ چاره صبـر است.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- صبـر حالتی ِ که ذهن در اون به «خواستن»، «شدن» و «طلبیدن» نـمی اندیشه. صبـر درست ضدِ «انتـظار» است. در «انتـظار» ذهن نا آروم ِ; مدام چیزی رو در آینده جست وُ جو میکنه. امّا صبـر کیفیتی ِ که ذهن وضع ِ موجود را همانگونه که هست می پذیره. «صبـر» یا عدم ِ آزمندی&amp;nbsp;چیزیِ مترادف با «نـخواستن»، چنـگ نیـنداختن، ملتهب نبودن و آرامش داشتن.&amp;nbsp;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- پس ما فقط لفظاً از «صبـر» صحبت میکنیم; ولی در عمل&amp;nbsp; حالتِ ذهنمون حالتِ انتظار ِ!؟!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;مشاهداً همینطور ِ، در واقع بسیاری از کلمات برایِ نوع ِ بشر معنا و مصداق ِ واقعی ندارنـد. وَ&amp;nbsp;کـُلاً، شما نمیـتونیـد واقعیت و محتوایِ اونها رو تجربه و حس کنیـد، مثـل ِ: حالتِ عشق، حالتِ آرامش و فراغت، حالتِ بی ترسی، و بسیاری حالت های دیگر ...!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- پـس اینطور آقا لاک پشته، ممنونم، روشنـم کردی. دیگه رفع ِ زحمت میکنم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; color=#333333&gt;- خواهش میشه، إی بشر ِ پـُر مـُدِعا! منم بر میگردم به&amp;nbsp;تجربه’&amp;nbsp;آرامش و صبـوریـم. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffff99&quot; color=#333333&gt;&amp;nbsp;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Sun, 04 Sep 2005 17:33:05 GMT</pubDate>
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